hind point
Uncategorized

कोहिनूर हीरा कैसे बनता है ? How Kohinoor Diamond Is Made

दुनिया का सबसे कीमती हीरा कोहिनूर के बारे में पूरी दुनिया जानती है लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि कोहिनूर जैसे बेशकीमती हीरे आखिर कैसे बनते हैं इसलिए आज हम आपको बताने वाले हैं कि हीरे कैसे बनते हैं और कहां बनते हैं।


भारत में सबसे पहले हिरा कहा मिला ?

भारत हजारों साल से हीरे के कारोबार का केंद्र रहा है और रोमन लोगों की धारणा थी कि हीरे जैसे पदार्थ भगवान के आंसू हुआ करते थे। 1700 के दशक के बाद से ही भारत विश्व का प्रमुख हिरा उत्पादक नहीं रहा। विश्व के पहले हीरे की खोज आज से करीब 4000 साल पहले भारत के गोलकुंडा क्षेत्र यानी कि हैदराबाद में नदी के किनारे चमकता हुआ रेत मे से हुआ था। पश्चिमी भारत के औद्योगिक क्षेत्र सूरत में दुनिया के 92% हीरो को काटने और पॉलिश करने का काम किया जाता है।

किस चीज से बनता है हीरा ?

हीरा एक पारदर्शी रत्न होता है। यह रासायनिक रूप से कार्बन का शुद्धतम रूप है इसमें बिल्कुल भी मिलावट नहीं होती है। यदि हीरो को ओवन में 763 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है तो यह जलकर कार्बनडाइऑक्साइड बना लेता है जिससे यह पता चलता है की हीरा 100% कार्बन से बना होता है। हिरा रासायनिक तौर पर बहुत निष्क्रिय होता है एवं सभी घोलको में घुलनशील होता है।

हीरा इतना मजबूत क्यों होता है ?

हीरे में सभी कार्बन परमाणु शक्तिशाली रूप से एक दूसरे से जुड़े होते हैं इसलिए यह बहुत कठोर होता है। हिरा प्राकृतिक पदार्थों में से सबसे कठोर पदार्थ माना जाता है। हिरा मे उपस्थित चारों इलेक्ट्रॉन सह संयोजी बंधन में भाग लेते हैं यानी एक भी इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र नहीं होता है इसलिए हीरा उष्मा तथा विधुत का कुचालक होता है। हीरे कई आकार के होते हैं।

हीरा कहां बनता है ?

वैज्ञानिकों के मुताबिक जमीन से करीब 160 किलोमीटर नीचे बहुत गर्म माहौल में हीरे बनते हैं और इसके बाद ज्वालामुखीयो की गतिविधियां इसे ऊपर की ओर लाती है। हीरा ग्रहों या पिंडों के टक्कर से भी बनते हैं। हीरे पृथ्वी की अथाह गहराइयों में बहुत ज्यादा दबाव और तापमान के बीच कार्बन के अनूप बहुत अनोखे ढंग से जुड़कर हीरे जैसे दुर्लभ पदार्थ में बदल जाते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो हीरा कोयले का एक रूप होता है जो जमीन के अथाह गहराई में लाखों साल के प्रक्रिया से गुजरने के बाद हीरे का रूप ले लेता है।

अमेरिका के एक German Logical Institute के शोध के मुताबिक बेहद गहराई से निकलने वाले हीरे रासायनिक रूप से शुद्ध होता है और यह अद्भुत रूप से पारदर्शी होता है। प्राकृतिक हीरे और फैक्टरी द्वारा बनाए गए हीरे के बीच फर्क पता लगाना बहुत मुश्किल है। हीरे की पहचान एक खास उपकरण से ही होती है लेकिन कुछ बेसिक तरीकों से भी असली हीरे की पहचान की जा सकती है।
1. असली हीरे की अंदर की बनावट उबड़ – खाबड़ होती है लेकिन फैक्ट्री में बनाया गया हीरा अंदर से सामान्य दिखता है।
2. हीरे को अखबार पर रखकर उसके पार से अक्षरों को पढ़ने पर अगर टेढ़ी लकीरे दिखे तो इसका मतलब है कि यह हीरा नकली है।
3. हीरे को पराबैगनी किरणों में देखने पर हिरा नीली रोशनी के साथ चमकता है तो वह हीरा असली है लेकिन अगर हीरा हल्की हरी, पीली रोशनी के साथ चमके तो वह हीरा नकली है।
4 . यह भी माना जाता है कि असली हीरा को पानी में डालने पर हीरा डूब जाता है और नकली हीरे को पानी में डालने पर हीरा डूबता नहीं है बल्कि तैरते रहता है।

iड्रैगन फ्रूट के फायदे। Benefits Of Dragon Fruit
iiपृथ्वी का वह क्षेत्र जो है नो फ्लाई जोन का हिस्सा। The Part Of The Earth That Is No Fly Zone
iiiबुलेट प्रूफ जैकेट पर गोली का असर क्यों नही होता है ? Why Does Bullet Proof Jacket Not Effect Bullet
ivदेश के 10 सबसे कमजोर करेंसी। Top 10 Weakest Currency In The World
ve – RUPI क्या है ? What Is e-Rupi
viआर्मी के जवानों को शराब क्यों पिलाई जाती है ? Why The Soldier Of The Indian Army Are Drink Wine

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *